Breaking News
नयार घाटी फिर बनेगी रोमांच का केंद्र, तीन दिवसीय फेस्टिवल की तैयारियां शुरू
नयार घाटी फिर बनेगी रोमांच का केंद्र, तीन दिवसीय फेस्टिवल की तैयारियां शुरू
जन्मदिन पर उत्सव नहीं, सेवा को समर्पित रहेगा सीएम धामी का दिन
जन्मदिन पर उत्सव नहीं, सेवा को समर्पित रहेगा सीएम धामी का दिन
सुप्रीम कोर्ट 7 अक्टूबर को सुनेगा बिहार एसआईआर पर अंतिम बहस
सुप्रीम कोर्ट 7 अक्टूबर को सुनेगा बिहार एसआईआर पर अंतिम बहस
“सांसद खेल महोत्सव-2025”- सांसद त्रिवेन्द्र सिंह रावत की अध्यक्षता में आयोजित हुई महत्वपूर्ण बैठक
“सांसद खेल महोत्सव-2025”- सांसद त्रिवेन्द्र सिंह रावत की अध्यक्षता में आयोजित हुई महत्वपूर्ण बैठक
लखवाड़ जल विद्युत परियोजना के प्रभावितों को मिलेगा तीन गुना मुआवजा, शासन ने दी मंजूरी
लखवाड़ जल विद्युत परियोजना के प्रभावितों को मिलेगा तीन गुना मुआवजा, शासन ने दी मंजूरी
मुख्यमंत्री धामी ने मॉरीशस के प्रधानमंत्री डॉ. नवीन रामगुलाम से की मुलाकात
मुख्यमंत्री धामी ने मॉरीशस के प्रधानमंत्री डॉ. नवीन रामगुलाम से की मुलाकात
‘बिग बॉस 19’ से नगमा मिराजकर और नतालिया का सफर खत्म, फैंस हुए निराश
‘बिग बॉस 19’ से नगमा मिराजकर और नतालिया का सफर खत्म, फैंस हुए निराश
ब्राजील के राष्ट्रपति ने अमेरिका पर साधा निशाना, कहा- “ब्राजील का लोकतंत्र बिकाऊ नहीं”
ब्राजील के राष्ट्रपति ने अमेरिका पर साधा निशाना, कहा- “ब्राजील का लोकतंत्र बिकाऊ नहीं”
अवैध निर्माण पर एमडीडीए का सख्त रुख, मसूरी में हर सेक्टर की होगी सख्त जांच
अवैध निर्माण पर एमडीडीए का सख्त रुख, मसूरी में हर सेक्टर की होगी सख्त जांच

पढ़ते समय सुन रहे हैं गाने तो जानें ये कितना सही, कितना गलत? कैसा म्यूजिक है फायदेमंद

पढ़ते समय सुन रहे हैं गाने तो जानें ये कितना सही, कितना गलत? कैसा म्यूजिक है फायदेमंद

म्यूजिक मूड को रिफ्रेश कर बेहतर बनाने में मदद कर सकता है, लेकिन ध्यान रखने की बात है कि म्यूजिक को हमेशा स्टडी टूल की तरह इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। पढ़ाई हमेशा शांत जगह ही करनी चाहिए। पढ़ाई हमेशा शांत माहौल में करना चाहिए, इससे ध्यान नहीं भटकता है और पढ़ी हुई चीज जल्दी याद होती है। अक्सर घर में बड़ों और स्कूल के टीचर्स को ऐसा कहते सुना होगा। यह बात काफी हद तक ठीक भी मानी जाती है लेकिन कुछ लोग ऐसे भी होते हैं, जो पढ़ते समय गाने सुना करते हैं।

जिससे लोगों के मन में सवाल उठता है कि क्या ऐसा करना सही है, क्या इससे पढ़ाई में मन लगता है या याद की हुई चीजें दिमाग में बैठती हैं। आइए जानते हैं इन सवालों के जवाब… पढ़ाते करते समय गाने सुनना गलत आदत है। इससे याददाश्त पर दबाव पड़ सकता है। यह इसी तरह है जब दो चैनल एक ही फ्रीक्वेंसी पर चल रहे हों. दरअसल, पढ़ाई और म्यूजिक एक साथ टकराव पैदा करती हैं. इससे पढ़ाई से मन भटक जाता है और टॉपिक भी याद नहीं रहता है. स्टडीज के मुताबिक, म्यूजिक सुनने से फोकस पर पॉजिटिव और निगेटिव दोनों तरह के असर पड़ सकते हैं। म्यूजिक मूड को रिफ्रेश करता है लेकिन तेज म्यूजिक से ध्यान भकटता है और परफॉर्मेंस पर असर पड़ सकता है।

इंस्ट्रूमेंटल म्यूजिक से ज्यादा नुकसान नहीं होता है. पढ़ाई करते हुए अगर इंस्ट्रूमेंटल म्यूजिक छात्र सुनते हैं तो इससे तनाव कम और एकाग्रता बढ़ सकती है. यह ध्यान भटकाए बिना अलर्टनेस बढ़ाती है. अनफैमिलियर म्यूजिक सुनने से मैथ्य और लैंग्वैज जैसे विषयों को पढने में परेशानी आ सकती है, जबकि फैमिलियर म्यूजिक चिंता कम कर परफॉर्मेंस में सुधार ला सकता है। म्यूजिक सुनने से मूड में सुधार होता है और अकेले रहने की भावनाएं कम होती हैं. एकाग्रता चाहने वालों को म्यूजिक नहीं सुनना चाहिए। गाने सुनने से बचें, स्लो और इंस्ट्रूमेंटल म्यूजिक सुन सकते हैं।  ऐसा म्यूजिक ही सुनने की कोशिश करें जो फीलिंग को स्ट्रॉग न करें।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back To Top