Health – Garh Bairat https://garhbairat.com National News Portal Sun, 14 Sep 2025 11:16:17 +0000 en-US hourly 1 https://wordpress.org/?v=6.8.2 https://garhbairat.com/wp-content/uploads/2025/02/cropped-Garh-Bairat-Logo.png-512x512-1-48x48.png Health – Garh Bairat https://garhbairat.com 32 32 युवाओं में बढ़ती धूम्रपान की आदत से हर साल हो रही लाखों भारतीयों की मौत https://garhbairat.com/the-growing-smoking-habit-among-youth-is-killing-millions-of-indians-every-year/ Sun, 14 Sep 2025 11:16:17 +0000 https://garhbairat.com/?p=20402

दुनियाभर में बदलती लाइफस्टाइल और अस्वास्थ्यकर आदतें गंभीर बीमारियों का कारण बन रही हैं। अनियमित दिनचर्या, नींद की कमी और लंबे समय तक निष्क्रिय रहना पहले से ही चिंता का विषय हैं, लेकिन हालिया रिपोर्ट बताती है कि युवाओं में बढ़ती धूम्रपान की लत सबसे खतरनाक साबित हो रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि तंबाकू सेवन हर साल लाखों भारतीयों की जान ले रहा है, बावजूद इसके देश में धूम्रपान छोड़ने की दर बेहद कम बनी हुई है।

रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में हर साल करीब 13.5 लाख लोगों की मौत धूम्रपान से जुड़ी बीमारियों के कारण होती है। विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि यह संख्या लगातार बढ़ रही है। खास बात यह है कि जागरूकता अभियानों और सरकारी प्रयासों के बावजूद युवा वर्ग में तंबाकू की खपत कम नहीं हो रही।

धूम्रपान से स्वास्थ्य पर घातक असर

विशेषज्ञों का कहना है कि धूम्रपान से हृदय रोगों का खतरा 2–3 गुना तक बढ़ जाता है। तंबाकू में मौजूद निकोटिन रक्त वाहिकाओं को सिकोड़ देता है, जिससे ऑक्सीजन की कमी और उच्च रक्तचाप की समस्या पैदा होती है। यही स्थिति आगे चलकर हार्ट अटैक, स्ट्रोक और सीओपीडी जैसी गंभीर बीमारियों को जन्म देती है। धूम्रपान न सिर्फ हृदय और फेफड़ों को, बल्कि शरीर के लगभग हर अंग को प्रभावित करता है।

आर्थिक बोझ भी भारी

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, भारत हर साल तंबाकू से संबंधित बीमारियों पर लगभग 1.77 लाख करोड़ रुपये खर्च करता है। यानी धूम्रपान स्वास्थ्य के साथ-साथ देश की अर्थव्यवस्था पर भी गहरा असर डाल रहा है।

विशेषज्ञों की राय

डॉ. सुनैना सोनी (एम्स-सीएपीएफआईएमएस) कहती हैं कि भारत में धूम्रपान छोड़ने की दर बहुत कम है, जो चिंताजनक है। ऐसे में सुरक्षित और टोबैको-फ्री निकोटीन विकल्पों पर जोर दिया जाना चाहिए, ताकि लोग सिगरेट छोड़ने की ओर कदम बढ़ा सकें।

कई वैश्विक रिसर्च बताती हैं कि स्मोक-फ्री निकोटीन उत्पाद धूम्रपान की तुलना में 95% तक कम हानिकारक होते हैं, क्योंकि इनमें टार और धुआं नहीं होता। हालांकि ये पूरी तरह सुरक्षित नहीं हैं, लेकिन धूम्रपान छोड़ने में मददगार साबित हो सकते हैं।

भारत के सामने चुनौती

भारत में हर 10 में से 1 व्यक्ति तंबाकू से जुड़ी बीमारियों के कारण समय से पहले मौत का शिकार होता है। सरकार ने 2025 तक तंबाकू उपयोग को 30% तक घटाने का लक्ष्य तय किया है, लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर वैकल्पिक उपायों और जागरूकता अभियानों को और मजबूत नहीं किया गया, तो यह लक्ष्य हासिल करना मुश्किल होगा।

(साभार)

]]>
क्या पेट में अक्सर रहता है हल्का दर्द: तो न करें नजरअंदाज, हो सकता है गंभीर बीमारी का संकेत https://garhbairat.com/do-you-often-have-mild-pain-in-the-stomach-then-do-not-ignore-it-it-could-be-a-sign-of-a-serious-illness/ Fri, 12 Sep 2025 11:26:14 +0000 https://garhbairat.com/?p=20340

पेट में समय-समय पर होने वाला हल्का दर्द अक्सर हमें सामान्य लगता है और हम इसे गैस, अपच या गलत खान-पान की वजह मानकर अनदेखा कर देते हैं। लेकिन अगर यह दर्द बार-बार हो या लंबे समय तक बना रहे, तो यह शरीर में किसी गंभीर बीमारी का शुरुआती संकेत भी हो सकता है। लगातार बने रहने वाला पेट दर्द सिर्फ एक साधारण समस्या नहीं है, बल्कि यह पाचन तंत्र, लिवर, किडनी या आंतों से जुड़ी कई स्वास्थ्य दिक्कतों की ओर इशारा कर सकता है। इसलिए इसे नजरअंदाज करने की बजाय समय पर कारण को समझना और इलाज करना बेहद जरूरी है।

इर्रिटेबल बाउल सिंड्रोम (IBS)

आईबीएस एक सामान्य लेकिन परेशान करने वाली समस्या है, जो बड़ी आंत को प्रभावित करती है। इसके लक्षणों में पेट में लगातार हल्का दर्द, गैस, पेट फूलना और कब्ज या दस्त जैसी परेशानी शामिल होती है। यह बीमारी लंबे समय तक बनी रहती है और तनाव या कुछ खास खाने की चीजों से बढ़ सकती है।

गैस्ट्राइटिस और अल्सर

पेट की अंदरूनी परत में सूजन को गैस्ट्राइटिस कहा जाता है, जिससे जलन और दर्द महसूस होता है। अगर इसका समय पर इलाज न किया जाए तो यह अल्सर का रूप ले सकती है। अल्सर होने पर खाली पेट या खाना खाने के बाद तेज दर्द महसूस होता है, खासकर पेट के ऊपरी हिस्से में।

पित्ताशय और लिवर संबंधी दिक्कतें

पेट के दाहिने ऊपरी हिस्से में लगातार बना रहने वाला दर्द पित्ताशय या लिवर की समस्या का संकेत हो सकता है। पित्ताशय की पथरी या फैटी लिवर की स्थिति में मतली, उल्टी और लगातार दर्द जैसे लक्षण सामने आते हैं। ऐसे मामलों में डॉक्टर से तुरंत संपर्क करना जरूरी है।

कब लें डॉक्टर की सलाह?

अगर पेट का दर्द दो हफ्तों से ज्यादा समय तक बना रहे या इसके साथ उल्टी, बुखार, खून की उल्टी, भूख न लगना और वजन कम होना जैसे लक्षण हों, तो इसे बिल्कुल भी नजरअंदाज न करें और तुरंत डॉक्टर से जांच कराएं।

बचाव और सावधानियां

संतुलित और पौष्टिक आहार लें।

तैलीय और मसालेदार भोजन से बचें।

रोजाना पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं।

तनाव से दूर रहने की कोशिश करें।

नियमित व्यायाम को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं।

(साभार)

]]>
हाई ब्लड प्रेशर को करना चाहते हैं कंट्रोल, तो इन योगासनों का करें अभ्यास, मिलेगा फायदा https://garhbairat.com/if-you-want-to-control-high-blood-pressure-then-practice-these-yogasanas-you-will-get-benefit/ Thu, 11 Sep 2025 10:33:40 +0000 https://garhbairat.com/?p=20301

आज की भाग-दौड़ और तनावपूर्ण जिंदगी में उच्च रक्तचाप (हाई ब्लड प्रेशर) एक आम लेकिन गंभीर स्वास्थ्य चुनौती बन चुका है। यह न केवल हृदय रोगों का कारण बनता है, बल्कि स्ट्रोक, किडनी की समस्याओं और दृष्टि पर भी असर डाल सकता है। ऐसे में सिर्फ दवाओं पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं होता। स्थायी और प्राकृतिक उपाय अपनाना जरूरी हो जाता है।

योग एक प्राचीन और वैज्ञानिक तरीका है, जो न केवल शरीर को स्वस्थ रखता है बल्कि मानसिक शांति और ऊर्जा भी प्रदान करता है। नियमित योगासन और प्राणायाम के अभ्यास से रक्तचाप नियंत्रित रहता है, तनाव कम होता है और जीवनशैली में सुधार आता है।

नीचे कुछ प्रभावशाली योगासन बताए गए हैं, जिनके नियमित अभ्यास से उच्च रक्तचाप को प्राकृतिक रूप से नियंत्रित किया जा सकता है:

उच्च रक्तचाप कम करने वाले 5 प्रभावशाली योगासन

1. शवासन (Shavasana)
शवासन सरल लेकिन बेहद प्रभावशाली योगासन है। यह पूरे शरीर को आराम देता है, तनाव और उच्च रक्तचाप को कम करता है। नियमित अभ्यास से मानसिक शांति मिलती है और हल्का अवसाद, सिरदर्द, थकान तथा अनिद्रा जैसी परेशानियां भी दूर होती हैं।

2. वज्रासन (Vajrasana)
वज्रासन पाचन तंत्र के लिए बेहद लाभकारी है। भोजन के बाद 5-10 मिनट इस आसन में बैठने से एसिडिटी, कब्ज और गैस जैसी समस्याओं में राहत मिलती है, जिससे रक्तचाप भी नियंत्रित रहता है। यह डायबिटीज में भी सहायक होता है।

3. सेतुबंधासन (Setu Bandhasana)
सेतुबंधासन दिल और फेफड़ों को मजबूत करता है, नसों को शांत करता है और रक्त प्रवाह को नियमित रखता है। यह कमर को मजबूत बनाता है और मानसिक तनाव कम करता है। अभ्यास के लिए पीठ के बल लेटकर घुटनों को मोड़ें और कूल्हों को धीरे-धीरे ऊपर उठाएं। 20-30 सेकंड तक इस स्थिति में रहें।

4. बालासन (Balasana)
बालासन मानसिक शांति और तनाव कम करने के लिए आदर्श है। वज्रासन में बैठकर शरीर को आगे झुकाएं और माथा ज़मीन पर टिकाएं। हाथों को आगे फैलाएं या शरीर के पास रखें। कम से कम 1-2 मिनट इसी स्थिति में रहें। यह आसन पीठ और कमर की थकान को भी दूर करता है।

5. प्राणायाम (Pranayama)
नियमित प्राणायाम, जैसे अनुलोम-विलोम और भ्रामरी, रक्तचाप को नियंत्रित करने में अत्यंत प्रभावी हैं। ये न केवल हृदय और फेफड़ों को मजबूत करते हैं बल्कि मानसिक तनाव और चिंता को भी कम करते हैं।

(साभार)

]]>
लिवर डिटॉक्स के लिए सबसे असरदार योगासन, पाएं प्राकृतिक हेल्थ बूस्ट https://garhbairat.com/most-effective-yoga-asanas-for-liver-detox-get-a-natural-health-boost/ Wed, 10 Sep 2025 09:44:59 +0000 https://garhbairat.com/?p=20265

लिवर हमारे शरीर का ऐसा अंग है जो पाचन क्रिया, खून को शुद्ध करने और हानिकारक तत्वों को बाहर निकालने में मुख्य भूमिका निभाता है। लेकिन आधुनिक जीवनशैली, फास्ट फूड, शराब और तनाव जैसी आदतें लिवर की सेहत को तेजी से प्रभावित करती हैं। लिवर के कमजोर होने पर थकान, अपच और कई गंभीर बीमारियां घेर सकती हैं। ऐसे में योगासन लिवर को डिटॉक्स करने और उसकी कार्यक्षमता बढ़ाने का एक सुरक्षित और प्राकृतिक उपाय है। रोजाना सिर्फ 10-15 मिनट योगाभ्यास करने से लिवर की सफाई, पाचन में सुधार और शरीर को ऊर्जा मिलती है।

1. भुजंगासन (Cobra Pose)
भुजंगासन करने से लिवर की मांसपेशियां सक्रिय होती हैं और खून का संचार तेज होता है। इससे लिवर पर जमा टॉक्सिन बाहर निकलते हैं और पाचन बेहतर होता है। यह पेट की अतिरिक्त चर्बी कम करने, रीढ़ की हड्डी को मजबूत बनाने और फेफड़ों की क्षमता बढ़ाने के लिए भी लाभकारी है।

2. धनुरासन (Bow Pose)
इस आसन में शरीर धनुष जैसा दिखाई देता है। इसे करने से पेट और लिवर पर हल्का दबाव पड़ता है, जिससे पाचन और लिवर की कार्यक्षमता में सुधार होता है। यह लिवर को डिटॉक्स करने और फैट कम करने में मददगार है। साथ ही पैंक्रियाज को टोन करता है। रोजाना 15–20 सेकंड के 2 सेट करना पर्याप्त है।

3. अर्ध मत्स्येन्द्रासन (Half Spinal Twist Pose)
यह आसन लिवर और पाचन तंत्र के लिए बेहद फायदेमंद है। इससे शरीर में जमी अशुद्धियां बाहर निकलती हैं और इंसुलिन का स्राव संतुलित होता है। नियमित अभ्यास से लिवर और किडनी की कार्यक्षमता भी बढ़ती है। इसे सुबह खाली पेट करना सबसे उत्तम माना जाता है।

4. कपालभाति प्राणायाम
कपालभाति लिवर की शुद्धि के लिए बहुत असरदार प्राणायाम है। इससे रक्त शुद्ध होता है और लिवर की कोशिकाएं सक्रिय होती हैं। यह पेट की चर्बी कम करने, वजन नियंत्रित रखने और पाचन को दुरुस्त करने में मदद करता है।

संतुलित आहार, पर्याप्त पानी और इन योगासनों का नियमित अभ्यास लिवर को स्वस्थ और सक्रिय बनाए रखता है।

(साभार)

]]>
क्या फेफड़ों की बीमारी का असर आंखों पर भी पड़ता है, आइये जानते हैं क्या कहते है स्वास्थ्य विशेषज्ञ https://garhbairat.com/does-lung-disease-also-affect-the-eyes-lets-know-what-health-experts-say/ Tue, 09 Sep 2025 10:48:00 +0000 https://garhbairat.com/?p=20228

आज की तेज़-तर्रार जिंदगी में स्वास्थ्य संबंधी खतरों में लगातार वृद्धि हो रही है। खासकर फेफड़ों की समस्याएं अब युवाओं में भी आम होती जा रही हैं। वायु प्रदूषण, धूम्रपान, संक्रमण और अस्वस्थ जीवनशैली ने फेफड़ों को कमजोर कर दिया है। इसके चलते अस्थमा, फेफड़ों में संक्रमण और पल्मोनरी फाइब्रोसिस जैसी गंभीर बीमारियां बढ़ रही हैं।

हाल के अध्ययनों में विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि पल्मोनरी फाइब्रोसिस का समय पर इलाज न करवाना न केवल फेफड़ों की कार्यक्षमता को प्रभावित करता है, बल्कि आंखों की रोशनी पर भी गंभीर असर डाल सकता है।

पल्मोनरी फाइब्रोसिस क्या है?

पल्मोनरी फाइब्रोसिस एक प्रगतिशील फेफड़ों की बीमारी है, जिसमें फेफड़ों में स्कार्स बनने लगते हैं। दुनिया भर में लगभग 3 से 5 मिलियन लोग इससे प्रभावित हैं। यह रोग आमतौर पर वृद्धों में देखा जाता है, लेकिन अब धीरे-धीरे युवाओं में भी इसके मामले बढ़ रहे हैं।

इडियोपैथिक पल्मोनरी फाइब्रोसिस (IPF) युवाओं में देखने को मिलता है। इस बीमारी का पूर्ण इलाज संभव नहीं है, लेकिन दवाओं और उपचार से जीवन की गुणवत्ता बेहतर बनाई जा सकती है।

फेफड़ों की बीमारी का आंखों पर असर

विशेषज्ञ बताते हैं कि पल्मोनरी फाइब्रोसिस से पीड़ित लोगों में फेफड़ों की कार्यक्षमता कम होने के कारण रक्त में ऑक्सीजन की कमी हो सकती है। ऑक्सीजन की कमी रेटिना और ऑप्टिक नर्व को प्रभावित करती है, जिससे दृष्टि में बदलाव और गंभीर मामलों में अंधापन तक का खतरा बढ़ सकता है।

इसलिए पल्मोनरी फाइब्रोसिस वाले मरीजों के लिए नियमित नेत्र परीक्षण बहुत जरूरी है। समय पर जांच और इलाज से आंखों की जटिलताओं को कम किया जा सकता है।

डॉक्टर क्या कहते हैं?

डॉक्टरों के अनुसार, पल्मोनरी फाइब्रोसिस में धुंधली दृष्टि, दृष्टि में बदलाव या रेटिना की क्षति जैसी समस्याएं देखने को मिल सकती हैं। शरीर में ऑक्सीजन की कमी से आंखों की रक्त वाहिकाओं पर असर पड़ता है, जिससे आंखों की स्थिति बिगड़ सकती है।

इलाज में आमतौर पर कॉर्टिकोस्टेरॉइड्स का उपयोग किया जाता है, लेकिन इसका इस्तेमाल मोतियाबिंद का जोखिम भी बढ़ा सकता है। इसलिए डॉक्टर मरीजों को नियमित निगरानी और सावधानी बरतने की सलाह देते हैं।

ब्रिटेन के ऑप्टिकल एक्सप्रेस के निदेशक डॉ. स्टीफन हन्नान कहते हैं कि पल्मोनरी फाइब्रोसिस वाले लोगों को अपनी आंखों की रक्षा के लिए समय-समय पर नेत्र जांच करानी चाहिए। साथ ही ऑक्सीजन स्तर की निगरानी, हाइड्रेशन और डॉक्टर्स की सलाह अनुसार आई ड्रॉप्स का उपयोग भी मददगार साबित होता है।

(साभार)

]]>
नमक ही नहीं, ये चीजें भी बढ़ा सकती हैं आपका ब्लड प्रेशर https://garhbairat.com/not-only-salt-these-things-can-also-increase-your-blood-pressure/ Sat, 06 Sep 2025 08:27:40 +0000 https://garhbairat.com/?p=20112

आजकल हाई ब्लड प्रेशर केवल बुजुर्गों की समस्या नहीं रह गई है। युवाओं में भी यह तेजी से बढ़ रही है। तनाव, नींद की कमी, फास्ट फूड की लत और लंबे समय तक बैठने की आदत ने ब्लड प्रेशर की उम्र घटा दी है। विशेषज्ञ इसे ‘साइलेंट किलर’ कहते हैं, क्योंकि यह धीरे-धीरे हृदय, किडनी, आंख और दिमाग को नुकसान पहुंचा सकता है।

क्या सिर्फ नमक ही जिम्मेदार है?

अक्सर लोग सोचते हैं कि ब्लड प्रेशर केवल ज्यादा नमक खाने से बढ़ता है। लेकिन आहार विशेषज्ञ बताते हैं कि यह केवल एक पहलू है। चीनी, अधिक कैफीन, शराब, धूम्रपान और लगातार स्क्रीन के संपर्क में रहना भी ब्लड प्रेशर बढ़ा सकता है।

इन आदतों से भी बढ़ सकता है ब्लड प्रेशर

विशेषज्ञों के अनुसार, अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड और पेय पदार्थों में मौजूद अतिरिक्त शुगर भी रक्तचाप बढ़ाने में योगदान देती है। शोध में यह पाया गया है कि जो लोग अपनी दैनिक कैलोरी का एक चौथाई या अधिक ऐडेड शुगर से लेते हैं, उनमें हाई ब्लड प्रेशर और हृदय रोग का जोखिम तीन गुना तक बढ़ जाता है। कोल्ड ड्रिंक्स, सोडा और रेडी टू ईट फूड्स में शुगर अधिक होती है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ क्या कहते हैं?

अधिकांश लोग शुगर के नुकसान के प्रति जागरूक नहीं हैं, इसलिए वह तय मात्रा से ज्यादा चीनी का सेवन कर लेते हैं। इसका नतीजा मेटाबॉलिक सिंड्रोम और टाइप-2 डायबिटीज जैसी बीमारियों के रूप में सामने आता है, जो हृदय और रक्त वाहिकाओं पर प्रतिकूल प्रभाव डालती हैं।

यूरिक एसिड और ब्लड प्रेशर का संबंध

कुछ शोध बताते हैं कि ज्यादा शुगर यूरिक एसिड को बढ़ा सकती है, जिससे किडनी की रक्त वाहिकाओं में तनाव आता है और ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है।

क्या करें ब्लड प्रेशर को कंट्रोल में रखने के लिए?

विशेषज्ञों का सुझाव है कि नमक के साथ-साथ ऐडेड शुगर और अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड्स को कम करें। इसके अलावा नियमित शारीरिक गतिविधि और स्वस्थ जीवनशैली ब्लड प्रेशर को नियंत्रण में रखने में मदद करती है।

(साभार)

]]>
पीठ या पेट में दर्द हो तो न करें नजरंदाज? हो सकता है किडनी स्टोन का संकेत https://garhbairat.com/if-you-have-back-or-stomach-pain-do-not-ignore-it-it-could-be-a-sign-of-kidney-stone/ Fri, 05 Sep 2025 09:36:09 +0000 https://garhbairat.com/?p=20075

किडनी स्टोन यानी गुर्दे में पथरी एक गंभीर और बहुत दर्दनाक स्वास्थ्य समस्या है, जो किसी भी उम्र के व्यक्ति को प्रभावित कर सकती है। यह छोटे-छोटे कठोर पत्थर शरीर में मौजूद खनिज और नमक के जमाव से बनते हैं। जब ये स्टोन किडनी से मूत्र मार्ग में प्रवेश करते हैं, तो तेज दर्द और कई अन्य स्वास्थ्य समस्याएं पैदा कर सकते हैं। अक्सर लोग पेट या पीठ में होने वाले दर्द को सामान्य गैस या अपच समझकर अनदेखा कर देते हैं, लेकिन अगर दर्द लगातार या बहुत तेज हो, तो यह किडनी स्टोन का संकेत हो सकता है।

किडनी स्टोन के प्रमुख कारण:

कम पानी पीना

असंतुलित खान-पान

अनुवांशिक कारण

समय पर पहचान और इलाज बहुत जरूरी है, क्योंकि इसे नजरअंदाज करने पर किडनी को स्थायी नुकसान हो सकता है।

किडनी स्टोन के आम लक्षण

1. पीठ या पेट में तेज दर्द
किडनी स्टोन का सबसे आम लक्षण पीठ के निचले हिस्से या पेट के किनारे में अचानक और तीव्र दर्द होना है। यह दर्द कमर से पेट और जांघों तक फैल सकता है। इतना तेज होता है कि व्यक्ति आराम से बैठ या लेट नहीं पाता।

2. पेशाब में बदलाव
पेशाब का रंग गहरा होना, खून आना, बार-बार पेशाब आना या पेशाब के दौरान जलन होना किडनी स्टोन के संकेत हो सकते हैं।

3. उल्टी और मतली
किडनी में दर्द पाचन तंत्र को भी प्रभावित कर सकता है, जिससे मतली और उल्टी की शिकायत हो सकती है। अक्सर इसे गैस या पेट की समस्या समझ लिया जाता है, लेकिन यह स्टोन का संकेत भी हो सकता है।

बचाव और इलाज

किडनी स्टोन से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका पर्याप्त मात्रा में पानी पीना है—दिन में कम से कम 8-10 गिलास। इसके अलावा, अधिक नमक और ऑक्सालेट (जैसे पालक, चुकंदर) वाले खाद्य पदार्थों का सेवन कम करें। यदि किसी में ऊपर बताए गए लक्षण दिखें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। डॉक्टर अल्ट्रासाउंड या एक्स-रे के जरिए स्टोन की पुष्टि कर सही इलाज सुझा सकते हैं।

(साभार)

]]>
मुंह के छोटे-छोटे छालों को न करें नजरअंदाज, हो सकते हैं ओरल कैंसर के संकेत https://garhbairat.com/do-not-ignore-small-ulcers-in-the-mouth-they-may-be-signs-of-oral-cancer/ Thu, 04 Sep 2025 10:15:02 +0000 https://garhbairat.com/?p=20045

अक्सर हम मुंह में होने वाले छोटे-छोटे छालों को मामूली समझकर अनदेखा कर देते हैं। आमतौर पर ये मसालेदार खाना खाने, पेट की गर्मी या विटामिन की कमी से होते हैं और कुछ ही दिनों में ठीक हो जाते हैं। लेकिन अगर कोई छाला दो सप्ताह से ज्यादा समय तक बना रहे, इसका आकार बढ़े, या दर्द बढ़े, तो यह मुंह के कैंसर का शुरुआती संकेत हो सकता है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, मुंह का कैंसर दुनिया में सबसे आम कैंसर में से एक है। इसकी सबसे बड़ी वजह तम्बाकू और शराब का सेवन है। समय रहते इसके लक्षण पहचान कर इलाज शुरू किया जाए, तो इसे सफलतापूर्वक नियंत्रित किया जा सकता है।

ओरल कैंसर के प्रमुख लक्षण

मुंह के कैंसर के लक्षण सिर्फ छालों तक सीमित नहीं हैं। इन पर ध्यान दें:

मुंह में सफेद या लाल धब्बे, जो आसानी से ठीक न हों।

मुंह में गांठ या सूजन, या खाना चबाने और निगलने में दर्द।

होंठ, मसूड़े या जीभ पर छाले या घाव।

आवाज़ में बदलाव या किसी तरह की असहजता।

तम्बाकू और शराब: मुख्य जोखिम कारक

सिगरेट, बीड़ी, सिगार, गुटखा, पान मसाला और शराब मुंह के कैंसर के सबसे बड़े कारण हैं। इनसे मुंह की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचता है और कैंसर का खतरा बढ़ता है। खासकर तम्बाकू और शराब का एक साथ सेवन, खतरे को कई गुना बढ़ा देता है।

बचाव के उपाय

तम्बाकू और शराब का सेवन बंद करें।

हरी सब्जियाँ और फल अपनी डाइट में शामिल करें।

मुंह की सफाई का नियमित ध्यान रखें।

अगर कोई लक्षण दो सप्ताह से ज्यादा बना रहे, तुरंत डॉक्टर से सलाह लें।

समय पर जांच और इलाज

मुंह के कैंसर का प्रारंभिक पता लगना ही सफल इलाज की कुंजी है। शुरुआती चरण में सर्जरी, रेडिएशन या कीमोथेरेपी से इसे ठीक किया जा सकता है। लेकिन इसे अनदेखा करने पर यह शरीर के अन्य हिस्सों तक फैल सकता है, जिससे इलाज कठिन हो जाता है। इसलिए जागरूकता, सावधानी और समय पर जांच ही इस बीमारी से बचने का सबसे प्रभावी तरीका है।

(साभार)

]]>
वजन घटाने के लिए बेस्ट योगासन, जिन्हें कर सकते हैं खड़े-खड़े https://garhbairat.com/best-yogasanas-for-weight-loss-which-can-be-done-while-standing/ Wed, 03 Sep 2025 06:36:40 +0000 https://garhbairat.com/?p=19994

आजकल ज्यादातर लोग वजन घटाने के लिए घंटों जिम में पसीना बहाते हैं, स्ट्रिक्ट डाइट फॉलो करते हैं या फिर महंगे फिटनेस प्रोग्राम्स पर खर्च करते हैं। लेकिन अगर आपके पास इतना समय या साधन नहीं है, तो भी चिंता की कोई बात नहीं। क्या आप जानते हैं कि सिर्फ खड़े-खड़े भी वजन घटाना संभव है? जी हां, योग और स्ट्रेचिंग के कुछ आसान आसनों की मदद से आप बिना झुके भी कैलोरी बर्न कर सकते हैं। यह तरीका खासतौर पर उन लोगों के लिए बेहतर है जो जिम नहीं जा पाते या कमर और पीठ दर्द से परेशान रहते हैं।

खड़े होकर किए जाने वाले योगासन जैसे ताड़ासन, वृक्षासन, त्रिकोणासन और उत्कटासन न सिर्फ पेट और कमर की चर्बी कम करने में मदद करते हैं बल्कि शरीर को एनर्जी और बैलेंस भी देते हैं। वहीं, स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज जैसे साइड बेंड, आर्म स्ट्रेच और नेक स्ट्रेच लचीलापन बढ़ाते हैं और ब्लड सर्कुलेशन को सुधारते हैं। रिसर्च के मुताबिक, महज 10–15 मिनट की खड़े होकर की गई एक्सरसाइज भी मेटाबॉलिज्म को एक्टिव कर कैलोरी बर्न करना शुरू कर देती है।

खड़े-खड़े करें स्ट्रेचिंग

सिर्फ कुछ मिनट की स्ट्रेचिंग से आप जिद्दी चर्बी पर काबू पा सकते हैं। यह मांसपेशियों को लचीला बनाती है और शरीर को एनर्जेटिक रखती है। सुबह उठते ही या रात को सोने से पहले खड़े होकर स्ट्रेचिंग करना बेहद फायदेमंद है।

वजन घटाने में मददगार खड़े होकर किए जाने वाले योगासन

ताड़ासन (Mountain Pose)
यह सबसे आसान योगासन है जो पूरे शरीर की मांसपेशियों को एक्टिव करता है और सही पॉश्चर बनाता है। रोज़ाना 5 मिनट ताड़ासन करने से पेट और कमर की चर्बी पर असर दिखने लगता है।

वृक्षासन (Tree Pose)
इस आसन से बॉडी बैलेंस बेहतर होता है और कोर मसल्स मजबूत बनते हैं। यह जांघों और पेट की चर्बी घटाने के साथ-साथ मानसिक एकाग्रता भी बढ़ाता है।

त्रिकोणासन (Triangle Pose)
यह आसन साइड स्ट्रेच कराता है जिससे कमर और पेट की चर्बी तेजी से कम होती है। साथ ही शरीर की फ्लेक्सिबिलिटी भी बढ़ती है।

उत्कटासन (Chair Pose)
इस आसन में खड़े होकर बैठने जैसी स्थिति बनती है। यह जांघ, हिप्स और पैरों की चर्बी घटाने के लिए बेहद असरदार है। इसे रोज़ 3–4 बार दोहराने से फैट बर्निंग और तेज़ हो जाती है।

(साभार)

]]>
कैसे पाएं गहरी और स्वस्थ नींद, जानिए एक्सपर्ट्स की सलाह https://garhbairat.com/how-to-get-deep-and-healthy-sleep-know-the-advice-of-experts/ Tue, 02 Sep 2025 09:34:39 +0000 https://garhbairat.com/?p=19970

आज की तेज़-तर्रार जिंदगी में नींद की कमी एक आम समस्या बन गई है। नींद सिर्फ आराम का समय नहीं है, बल्कि यह हमारे शरीर और दिमाग को रिचार्ज करने का सबसे महत्वपूर्ण तरीका है। नींद न पूरी होने पर थकान, ध्यान की कमी, मूड स्विंग और कई स्वास्थ्य समस्याएं होने का खतरा बढ़ जाता है। विशेषज्ञ बताते हैं कि अक्सर हमारी रोज़मर्रा की आदतें ही नींद को प्रभावित करती हैं। आइए जानते हैं सोने से पहले कौन-सी छोटी-छोटी गलतियां आपकी नींद चुरा सकती हैं और उनसे कैसे बचा जा सकता है।

1. सोने से पहले मोबाइल और लैपटॉप का इस्तेमाल

मोबाइल, लैपटॉप और टैबलेट की नीली रोशनी मेलाटोनिन नामक हार्मोन के उत्पादन को रोक देती है। यह हार्मोन हमारे सोने-जागने के चक्र को नियंत्रित करता है। स्क्रीन के लगातार संपर्क में रहने से दिमाग सक्रिय रहता है और नींद आने में मुश्किल होती है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि सोने से कम से कम एक घंटा पहले सभी गैजेट्स से दूरी बनाएं।

2. रात में भारी या मसालेदार खाना

सोने से ठीक पहले तला-भुना, मसालेदार या भारी खाना खाने से पाचन में परेशानी होती है और नींद बाधित होती है। पेट भोजन पचाने में व्यस्त रहता है, जिससे शरीर को आराम नहीं मिलता। हल्का, सुपाच्य खाना लेना नींद को बेहतर बनाता है और पाचन से जुड़ी समस्याओं से भी बचाता है।

3. कैफीन और शराब का सेवन

कॉफी, चाय, सोडा या शराब सोने से पहले लेने से नींद प्रभावित होती है। कैफीन दिमाग को सक्रिय रखता है, जबकि शराब नींद को शुरू में तो लुभावनी लग सकती है, लेकिन यह सोने के चक्र को बाधित कर देती है। इसका असर यह होता है कि नींद बार-बार टूटती है और रात भर नींद पूरी नहीं होती।

अच्छी नींद पाने के टिप्स

हर दिन एक ही समय पर सोने और उठने की कोशिश करें।

सोने से पहले कमरे में अंधेरा और शांत वातावरण बनाएं।

सोने से पहले हल्की किताब पढ़ना या ध्यान करना मददगार हो सकता है।

लंबे समय तक नींद की समस्या हो तो डॉक्टर से सलाह अवश्य लें।

(साभार)

]]>