30 जून। देहरादून (गढ़ बैराट न्यूज़) उत्तराखंड शासन के वरिष्ठ और लोकप्रिय प्रशासनिक अधिकारी अतर सिंह आज 36 वर्षों की निष्कलंक सेवा पूरी कर सेवानिवृत्त हो गए। उनके विदाई के अवसर पर सचिवालय में भावुक माहौल देखने को मिला। अधिकारी से लेकर कर्मचारी तक सभी ने उन्हें आदरपूर्वक शुभकामनाएँ दीं और कहा – “आप जैसा कोई नहीं”।
जौनसार-बावर के प्रसिद्ध राजनीतिक परिवार से ताल्लुक रखने वाले अतर सिंह, पूर्व मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रीतम सिंह के छोटे भाई हैं। लेकिन उन्होंने अपने प्रशासनिक जीवन में कभी भी पारिवारिक या राजनीतिक प्रभाव का उपयोग नहीं किया। शासन में उन्होंने सदैव ईमानदारी, पारदर्शिता और जनहित को प्राथमिकता दी।
फाइलों की भीड़ नहीं, फैसलों की गति थी पहचान – सचिवालय में अतर सिंह उन अधिकारियों में गिने जाते थे जिनके टेबल पर फाइलों का ढेर नहीं देखा जाता था। विभागीय फाइल आते ही वे उसका त्वरित निस्तारण कर आगे बढ़ा देते थे। सचिवालय में लोग यह कहते नहीं थकते कि “पहली चाय अतर सिंह जी के कार्यालय से ही मिलती है”, क्योंकि जौनसार-बावर से आने वाले आमजन अक्सर उनके पास सलाह और सहयोग के लिए पहुँचते थे।
जनसेवा के लिए पद नहीं, भावना थी प्राथमिकता – अतर सिंह ने एक वर्ष पूर्व ही स्वेच्छा से शासकीय विशेषाधिकारों से दूर रहना प्रारंभ कर दिया था। उनका मानना था कि “सरकारी सुविधाभोग जीवन की आदत नहीं बननी चाहिए।” ग्रामीण प्रवास या पारिवारिक यात्राओं में उन्होंने कभी भी सरकारी वाहन का उपयोग नहीं किया। वे निर्णय प्रक्रिया में बेहद सजग और विवेकशील माने जाते थे। यदि किसी प्रस्ताव में जनहित स्पष्ट नहीं होता, तो वे बिना भय या संकोच के उसका विरोध करते थे और तब तक चर्चा करते रहते जब तक हर पहलू स्पष्ट न हो जाए।
एक प्रेरणास्रोत प्रशासक की विदाई
उत्तर प्रदेश से लेकर उत्तराखंड राज्य गठन तक, अतर सिंह ने कई वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों के साथ काम किया। उन्होंने राज्य की कार्य संस्कृति को नई दिशा दी, जिसे आने वाली पीढ़ियाँ स्मरण करेंगी। उनकी सेवानिवृत्ति पर सचिवालय परिसर में हर कोई भावुक दिखा। अधिकारी, कर्मचारी और आमजन—सभी ने उनके सरल स्वभाव, कर्मनिष्ठा और जनसेवा के प्रति समर्पण को सराहा।
सेवानिवृत हुए अतर सिंह भी सभी को विनम्रता से धन्यवाद देते हुए मंद मंद मुस्कान के साथ आगे बढ़ते चले गए, अपने जीवन की महत्वपूर्ण 36 वर्ष की यात्रा को सफलतापूर्वक पूरा कर संतोष और जीवन के सुखद अनुभव को लेकर सचिवालय से जाखन स्थित अपने घर ओर प्रस्थान किया।

